मिर्जापुर जनपद में एक ऐसा विद्यालय है जहां पर रास्ते की कोई व्यवस्था नहीं है. बच्चे खेत के कीचड़ वाले मेड़ से स्कूल जाने को मजबूर होते हैं.कई छात्र फिसल कर गिर भी जाते हैं. बारिश के दिनों में रास्ते की समस्या के चलते छात्रों की विद्यालय में उपस्थित भी काम हो जाती है. यह समस्या एक-दो दिन से नहीं बल्कि 40 वर्षों से बनी हुई है. पढ़ाने वाले शिक्षक से लेकर ग्रामीण तक कई बार उच्च अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं उसके बाद भी कोई विकल्प नहीं निकल पा रहा है. डीएम पवन कुमार गंगवार ने दिया बेतुका बयान कहा खबर अच्छी है तो चलाइए बाईट नहीं देंगे.
सरकार विकास के नाम पर किसानों की जमीन लेकर उन्हें मुआवजा देकर बड़ी-बड़ी सड़के तो बना रही है. मगर देश के भविष्य तय करने वाले नोनीहालों को तीन फीट की सड़क तक की व्यवस्था नहीं कर पा रही है. हम बात कर रहे मिर्जापुर जनपद के जिला मुख्यालय से महज चार किलोमीटर दूर स्थिति विकासखंड नगर के चेरुईराम कंपोजिट विद्यालय की जहां 40 वर्षों से छात्र खेत के मेड़ के पगडंडी से आने जाने को मजबूर है. बारिश की मौसम में छात्र चप्पल जूते हाथ में लेकर स्कूल पहुंचते हैं. यही नहीं कुछ छात्र मेड़ पर कीचड़ जमे होने के चलते गिर भी जाते हैं, जब किसानों के फसल नुकसान होते हैं तो किसान भी उन्हें फटकार लगाते हैं और मारते भी है जिसके कारण बारिश में छात्र कुछ स्कूल नहीं जाते हैं और स्कूल में छात्रों की उपस्थिति कम हो जाती है. उत्तर प्रदेश सरकार जिन प्राथमिक विद्यालय में 50 से कम छात्रों की संख्या है उसे मर्जर या बंद करने का फैसला लिया है. वही मिर्जापुर के नगर विकासखंड के चेरुईराम कंपोजिट विद्यालय में 438 छात्रों की संख्या है. यह सभी छात्र गांव के हैं. बारिश के दिनों में रास्ते के कारण स्कूल में छात्रों की संख्या कम हो जाती है जिससे शिक्षक परेशान होते हैं.इन छात्रों को पढ़ाने के लिए 12 शिक्षक लगे हुए हैं. विद्यालय के शिक्षक का कहना हैं यहां पर रास्ता नहीं है बच्चे खेत के मेड़ से आते हैं जिनका खेत है वह मना करते हैं और बच्चों को डांटते मराते भी हैं, हम लोगों के लिए भी कोई रास्ता नहीं है किसी तरह स्कूल पहुंचते हैं.बारिश की दिनों में सबसे ज्यादा समस्या होती है रास्ता न होने के कारण छात्रों के अभिभावक स्कूल नहीं भेजते हैं ,क्योंकि छात्र आते हैं तो कभी-कभी गिर भी जाते हैं और चोटिल भी होते हैं.स्कूल में संख्या कम होने पर हम शिक्षक परेशान होते हैं.
स्कूल में पढ़ रहे छात्र अंशु, गोविंद और आदित्य यादव ने बताया स्कूल आने के लिए रास्ता नही होने के चलते खेत के मेड़ से आना पड़ता है बारिश के समय फिसल कर गिर भी जाते चोटिल भी होते हैं. खेत में गिर जाने से किसान भी डांटते मारते हैं यही नही ज्यादा बारिश होने पर कुछ बच्चे घर पर ही रुक जाते हैं. हम छात्रों की मांग है कि सड़क सरकार और जिला प्रशासन बनवा दे.
ग्रामीण "कौशिक कनौजिया" ने बताया कि 1985 से प्राथमिक विद्यालय बना हुआ है इस कंपोजिट विद्यालय चेरुईराम में लगभग 500 लगभग बच्चे पढ़ते हैं. जिस खेत के मेड़ से आते थे किसान उसे भी काट दिए हैं पतला सा बचा हुआ है. बारिश हो जाने पर बच्चों को आने-जाने में परेशानी होती है कुछ बच्चे गिर भी जाते हैं चोटिल भी हो जाते हैं इसकी शिकायत ग्रामीणों ने जिला अधिकारी से भी की है. आज तक कोई अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे है. बच्चे मजबूर होकर आते जाते हैं. एक बार विरोध करने पर तहसीलदार आए हुए थे कहां किसानों कि जमीन है इसमें मैं कुछ नहीं कर सकता हूं.
स्कूल के "प्रधानाचार्य अनुराधा सिंह" बताती हैं इस स्कूल में आने जाने में बहुत परेशानी होती है. इस विद्यालय के लिए सड़क नहीं है पगडंडी था गांव वाले उसे भी हटा दिए हैं. बच्चे खेत के मेड़ से आते हैं तो किसान भी डाटते हैं. बारिश के समय ग्रामीण कभी-कभी बच्चों को खेत में भी धक्का दे देते हैं और खेत मे चले जाने पर बच्चे मार भी खाते हैं. जिसके चलते हमारे बच्चों की उपस्थिति काम हो जाती है. प्रधानाचार्य ने मांग किया कि बच्चों के लिए सरकार सड़क बनवा दे बहुत ज्यादा नहीं केवल 3 फीट ही बनवा दे तो बच्चे पैदल ही आ जाएंगे. इसकी शिकायत हमने अपने विभाग से भी की है बीएसए भी आकर देख चुके हैं. बीएसए भी बोलते हैं की जमीन नहीं है तो रास्ता कैसे बन सकता है उनका भी कहना ठीक है. शिक्षक भी गाड़ी से स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं, बारिश होने पर कीचड़ से ही आना पड़ता है.
ग्राम प्रधान भोनू लाल बिंद ने न्यूज़ अड्डा क्लिक से फोन पर बात करते हुए बताया कि कई सालों से प्रयास किया जा रहा है काश्तकार जमीन देने को तैयार नहीं है, जिसके कारण सड़क नहीं बन पा रही है, इसके लिए एसडीएम तहसीलदार और एबीएस के साथ देहात कोतवाली प्रभारी भी एक बार विरोध करने पर पहुंचे हुए थे इसके बावजूद भी अभी कोई निर्णय नहीं हो पाया है कोशिश की जा रही है कुछ किसान तैयार हो रहे हैं और किसानों को तैयार कर लिया जाएगा जल्द ही सड़क निकलवाने का प्रयास किया जाएगा. सड़क न होने से बच्चों को बहुत परेशानी होती है बारिश के मौसम में बच्चे कीचड़ वाले खेत के रास्ते जाने को मजबूर होते हैं
"मझवां विधायक शुचिस्मिता मौर्य" ने न्यूज़ अड्डा क्लिक से फोन पर बात करते हुए कहा कि आधिकारी क्यों नहीं चाह रहे हैं, यह तो बीएसए को ध्यान देना चाहिए. कई विद्यालय पर हाई टेंशन का तार जा रहा था उसको हटवाने का काम मैंने अपने विधानसभा में किया है.समिति की बैठक मैं भी बीएसए महोदय से मांगा था कितने विद्यालयों में हाईटेंशन तार गया है उसे तक हमें अभी नहीं दिया.यह बीएसए महोदय सुनते नहीं है कोई काम हमारा नहीं करते ,यह बीएसए को देखना चाहिए रास्ता क्यो नही है. आपके द्वारा स्कूल में रास्ता न होने का संज्ञान में आया है ,आगे मैं प्रयास करती हूं इसमें मैं क्या कर सकती हूं.
वही इस मामले में जब "बीएसए अनिल कुमार वर्मा" से बात की गई तो कैमरे के सामने आने से कई दिन से बचते रहे. अपने जवाब देही देने की जगह मौखिक रूप से बताया कि उस विद्यालय में रास्ता नहीं है ज्यादा जानकारी के लिए आप एसडीएम से बात कर सकते हैं सड़क क्यों नहीं बन पा रही है. "जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार" ने बीएसए से भी आगे बढ़कर कहा आपने रिसर्च कर खबर बनाई है ख़बर अच्छी तो चलाइए इसमें हम बाईट नहीं देंगे. डीएम किसानों की जमीन में कैसे सड़क बनवा देगा. कुल मिलाकर कहा जाए तो जिले के अधिकारी काम करने की बजाय समय पास कर रहे हैं. बड़े-बड़े सड़के किसानों की जमीन को लेकर मुआवजा देकर सड़क का निर्माण कराया जा रहा है लेकिन देश के भविष्य के लिए इनके पास सोचने की कोई ऑप्शन नहीं है.
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