मिर्जापुर जनपद के लाल ने अमेरिका में अपना परचम लहराया है.अमेरिका के अलबामा प्रांत के बर्मिंघम में 30 जून से 6 जुलाई के बीच चल रहे विश्व पुलिस एवं अग्निशमन खेल प्रतियोगिता के पोलवाल्ट में शानदार खेल खेलते हुए रसिया के खिलाड़ी को पछाड़कर भारत की झोली में गोल्ड मेडल लाकर देश का नाम रौशन किया है.कभी रेत की मैट पर बांस से अभ्यास करते थे.
मिर्जापुर जिले के जमालपुर ब्लॉक के खिरौड़ी गांव के किसान नंदलाल पांडेय के बेटे शेखर पाण्डेय ने एक बार फिर विश्व में भारत का नाम रोशन किया है.अमेरिका के अलबामा प्रांत के बर्मिंघम में 30 जून से 6 जुलाई के बीच हो रहे विश्व पुलिस एवं अग्निशमन खेल प्रतियोगिता के पोलवाल्ट में शानदार खेल खेलते हुए रसिया के खिलाड़ी को हराकर भारत की झोली में गोल्ड मेडल लाकर देश का नाम रौशन किया है.इसके पहले इसी प्रतियोगिता में रजत पदक जीत चुके हैं. शेखर पाण्डेय वर्ष-2021 में सीआईएसएफ में सब इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्त हुए थे. शेखर का रूझान बचपन से ही खेल प्रति रहा है. देश के लिए 18मेडल और प्रदेश में 30 मेडल जीतकर कामयाबी के शिखर पर पहुंच रहे शेखर पाण्डेय सीआईएसएफ में नौकरी के बाद भी खेलकूद से जुड़े है. शेखर पाण्डेय ने अपनी प्राथमिक शिक्षा गांव के बगल में प्राथमिक विद्यालय खेमईबरी से की है इसके बाद हाई स्कूल और इंटर देवकली इंटर कालेज जमालपुर से पूरा किया है. इस कामयाबी को लेकर लोग बधाई दे रहे हैं.
कभी बांस के खंभे और रेतीले मैट पर अभ्यास करते थे शेखर
यूपी के गाजीपुर जिले के एक गांव में स्कूल स्तर की एथलेटिक मीट चल रही थी, जिसमें पोलवाल्ट ने इस दौरान 15 वर्षीय लड़के को आकर्षित किया, और वह दृढ़ संकल्पों के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया. साधारण किसान परिवार में जन्मे शेखर पांडेय ने सुविधाओं के अभाव में बांस की छड़ियों को डंडे के रूप में इस्तेमाल किया और गंगा के तट पर रेती पर अपना अभ्यास कार्य शुरू किया.सबको आश्चर्य तब हुआ जब शेखर ने बिना किसी मार्गदर्शन के मात्र एक सप्ताह के अभ्यास के बाद जिला स्तरीय चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीत लिया.शेखर बताते है 'जब मैंने पहली बार पोल वॉल्टिंग देखी, तो मुझे यह बहुत आसान लगा, क्योंकि मैं बांस की छड़ियों का उपयोग करके छोटी नदियों पर ,कूदा करते थे.मैंने बिना किसी उचित प्रशिक्षण के जिला स्तर पर पदक जीता, जिससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा उसी का नतीजा है कि आज हम यहां पहुंचे हैं.
शेखर को वाराणसी में खेल के तकनीकी पहलुओं के बारे में चला था पता
शेखर ने बताया कि वाराणसी में मुझे खेल के तकनीकी पहलुओं के बारे में पता चला और मैंने अभ्यास शुरू किया.मेरे सीनियर रक्षित कुमार ने मुझे अभ्यास के लिए अपना फाइबर पोल दिया.यह पहली बार था जब मैंने फाइबर पोल देखा था. स्टेडियम में उनके कोच राजेंद्र सिंह ने उन्हें केवल 15 दिनों के लिए प्रशिक्षित किया, उस दौरान राष्ट्रीय कोच प्रभाष चंद्र त्यागी से उनका परिचय कराकर उनकी जिंदगी बदल दी, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने में मदद की.
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