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मिर्जापुर : श्रम विभाग के दो लेबर अफसरों पर होगी कार्रवाई,जांच में योगी सरकार के अधिकारी कर रहे लीपापोती

मिर्जापुर : श्रम विभाग के दो लेबर अफसरों पर होगी कार्रवाई,जांच में योगी सरकार के अधिकारी कर रहे लीपापोती

  •   संतोष गिरी
  •  2025-09-09 08:31:00
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उत्तर प्रदेश के श्रम विभाग में लेबरों के हक को छीना जा रहा है। भ्रष्टाचारियों पर योगी सरकार अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रही है। ऐसा ही एक मामला राज्य के मिर्जापुर जिले से सामने आया है, जहां हजारों श्रमिकों के हक को लेबर अफसरों ने लूटकर फर्जी लोगों में बांट दिया। मामले का खुलासा तब हुआ जब एक स्थानीय पत्रकार व मजदूर नेता मंगल तिवारी ने मजदूरों के लिए आवाज़ उठाई। मंगल तिवारी की शिकायत पर यू.पी. बी. ओ. सी. डब्ल्यू. बोर्ड ने जांच के आदेश दिए। श्रम विभाग उत्तर प्रदेश ने वाराणसी के उप श्रम आयुक्त धर्मेंद्र कुमार सिंह को जांच अधिकारी नामित किया। जांच अधिकारी की 9 सदस्यों की टीम ने जांच की। जांच के उपरांत सौंप गए रिपोर्ट के आधार पर बोर्ड सचिव, पूजा यादव ने 2 लेबर अफसरों निमेष कुमार पाण्डेय व कौशलेंद्र कुमार सिंह को जिले में नियुक्ति के दौरान फर्जी लोगों को योजना का लाभ देने के मामले में दोषी पाए जाने पर नियमानुसार विभागीय कार्यवाही की संस्तुति की है। शिकायत में जिन 1072 आवेदनों का जिक्र है उसमें फर्जी लोगों से वसूली का पत्र जारी किया गया है। वहीं कार्यालय में नियुक्त कंप्यूटर ऑपरेटर अरुण दुबे पर भीइकार्रवाई के संकेत दिए गए हैं। मामला 2021 का है, जून 2023 में मजदूर नेता मंगल ने मजदूरों के हक के लिए आवाज़ उठाई थी। शिकायत के अनुसार दोनों लेबर अफसरों ने बोर्ड के नियमों का अनदेखी कर अपात्रों के आवेदन को पास किया। प्रमुख सचिव श्रम, अध्यक्ष, उ.प्र. भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के निर्देश पर 9 सदस्यीय जांच टीम में वाराणसी, भदोही और जौनपुर जिले के अधिकारी शामिल थे, जिसका मार्गदर्शन उप श्रमायुक्त उत्तर प्रदेश, वाराणसी धर्मेंद्र कुमार सिंह ने की। विभागीय सूत्रों की माने तो मिर्जापुर कार्यालय में दलालों की मदद से बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। यदि आरोपी अधिकारियों के कार्यकाल की सारी आवेदनों की जांच की जाय तो यह उत्तर प्रदेश के बड़े भ्रष्टाचार में से एक होगा। फिलहाल अभी जांच मात्र 1072 आवेदनों से संबंधित है। शिशु एवं बालिका मदद योजना पर कारवाई हो रही है। कन्या विवाह सहायता योजना, निर्माण कामगार मृत्यु एवं दिव्यांगता सहायता योजना में हो रही गड़बड़ियों की चर्चा जोरों पर है। शिशु एवं बालिका मदद योजना आवेदनों में लेबर अफसरों पर कार्रवाई हो रही है। इस सूची में कुछ आवेदक को छोड़कर बड़ी मात्रा में आवेदको ने बोर्ड के नियमों का पालन नहीं किया है, बावजूद इसके अफसर ने सभी के खाते में जांच में पात्र दिखाकर पैसे भेज दिए। साफ जाहिर है कि योजना में जमकर लूट हो रही है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि शिशु हितलाभ के लिए 2022, 23 में किए गए संदिग्ध आवेदनों पर अब जाकर 2025 में चुन-चुन कर भुगतान किए जाने जा रहे हैं। विभागीय लेबर अफसरों ने हद तब कर दी जब 2025 में आवेदन किए गए फर्जी निर्माण श्रमिकों के खाते में भी मई माह में भुगतान करा दिया। इस पूरी गड़बड़ी में सबसे बड़ा कार्यकाल तत्कालीन सहायक श्रमायुक सुविज्ञ सिंह का है, जिन्होंने शिकायतों पर अपनी आंखे मूंदे रखी, यहां यह बताना आवश्यक है कि शिशु हितलाभ योजना में भुगतान की कार्यवाही सहायक श्रमायुक्त द्वारा की जाती है।

मीडिया से बचती रही है जांच टीम

बताते चलें कि मीडिया द्वारा 1072 की जांच के दौरान जांच टीम से कुछ सवालात किए गए थे, लेकिन मीडिया के पूछे गए सवालों (जिला प्रशासन को खबर किए बिना जांच, जांच के बिंदु, श्रम कार्यालय आए बगैर गेस्ट हाउस में बैठकर जांच, शिकायतकर्ता को सूचना आदि ) का जवाब न तो नामित जांच अधिकारी धर्मेंद्र सिंह के पास था न ही वर्तमान उप श्रमायुक्त मिर्जापुर क्षेत्र पिपरी, सोनभद्र अरुण कुमार सिंह के पास। योगी सरकार के अधिकारी इतने मनबढ़ हैं कि जांच की जानकारी तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट प्रियंका निरंजन को भी देना उचित नहीं समझा। यह बात उन्हें भी सोशल मीडिया के माध्यम से पता चला और फटकार लगाई। आरोप लगना जायज़ था, जांच निष्पक्ष नही था और न है, ऐसा आरोप लग रहा है। जांच अधिकारी व विभाग के मुख्यालय के बड़े अफसर न जाने क्यों अपने विभाग के भ्रष्ट अधिकारी को बचाने का प्रयास करते चले जा रहे हैं। जांच के नाम पर खानापूर्ति हो रही है, चूंकि मामला बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का है जिसे जांच टीम भी नहीं पचा पायी।

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